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जाति और धर्म के संगठन क्या करें – समाज के विकास, कल्याण और उत्थान के लिए

जाति, समुदाय और धर्म के संगठन किस तरह से कर सकते है समाज के विकास, कल्याण और उत्थान के लिए सकारात्मक परिवर्तनकारी कार्य.
विभिन्न धर्मों और समाजों, जातियों के संगठन, समूह, समाज, संघ और एकता मंच बने हुए हैं. सामाजिक स्तर पर सामूहिक रूप से विभिन्न आयोजन कार्यक्रम किए जाते हैं. विभिन्न आयोजनों में समाज, जाति और धर्म के संगठनों की एक विशिष्ठ भूमिका और योगदान होता हैं. दहेज़ को रोकने के लिए विभिन्न समाजों ने अपने स्तर पर सामूहिक विवाह के आयोजन करवाते आ रहे हैं, इसमें कम खर्च में अच्छे आयोजन समारोह रीति रिवाजों के अनुसार संपन्न करवाए जाते हैं. सामाजिक स्तर पर अपनी जाति और अपनी बिरादरी के उत्थान, विकास और एकजुटता के लिए जो शुरुआत कई समाजों में की गई हैं वह अनुकरणीय हैं. इसको दूसरे समाजों ने भी उनको अपनाया हैं जिससे उनके जाति-समाज व सदस्य विकास की दिशा में वे आगे बढे हैं.
हालाँकि कुछ स्तर पर समाज और जाति बिरादरी के संगठन जो कर रहे हैं वह सामाजिक और नैतिक मर्यादाओं के अनुकूल नहीं हैं लेकिन ऐसे मामलों का समाज के स्तर और कानून के स्तर पर आगे जाकर समाधान किया जाता हैं, नहीं किया जाता हैं तो किया जाना चाहिए, किया जा सकता हैं. कई जाति बिरादरी और धर्म के संगठन अपने क्षेत्र में अपने गलत लोगों को बचाने और दूसरे समाज, जाति, समुदाय, क्षेत्र, धर्म के लोगों पर हमले, नुकसान करते हैं उनके सदस्यों के मानवीय, नैतिक और सामाजिक अधिकारों के हनन और उनके अधिकारों पर हमले करते हैं, उनके अधिकार नष्ट करते हैं; ऐसा कार्यों के पीछे ऐसे संगठनों के कुछ चुनिन्दा लोगों की यह मानसिकता रहती हैं कि दूसरों को नुकसान पहुंचकर वे अपना और अपने साथ वालों का फायदा करने का सोचते हैं और इसके लिए वर्चश्व कायम करने का सोचते हैं जो कि जातिवाद, सांप्रदायिक और कानून विरोधी दायरे में आता हैं, जो सर्वथा अनुचित हैं और यह उनके स्वयं के लिए, उनके परिवार, जाति, बिरादरी, धर्म, और क्षेत्र के लिए भी नुकसानदायक हैं. हम जिस मानव समाज में रहते हैं ऐसा करना इस व्यवस्था के सर्वमान्य नियमों के विपरीत हैं.
लेकिन समाज और जाति के जो संगठन बने हैं वे मूलतः अपनी बिरादरी के विकास उत्थान के लिए बने हैं. ऐसे लोगों को सही दिशा में लाने और सकारात्मक दिशा में सोचने और आगे बढाने के लिए उनके समाज के और दूसरे समाज के लोग आगे आते हैं, उन्हें सही रास्ता दिखाते हैं. अगर उनका निजी, अनैतिक गैर कानूनी हित लाभ उसके पीछे निहित नहीं होता हैं तो वे सही दिशा में आगे जाते हैं. वे अपने दायरे में जो करते हैं उनके लिए समाज कानून और व्यवस्था हैं. अगर संगठन अपने पास उपलब्ध दायरों के तहत, जिस दावे और जाहिरा तौर पर कही जाने वाली बात और उद्देश्य के लिए बनाए गए हैं उस हेतु वास्तव में संकल्परत, कार्यरत हैं या अमल करते हैं तो वे संगठन, संघ, बिरादरी, समुदाय कम से कम अपने दायरे और उपलब्ध संसाधनों से अपने परिवार, जाति, बिरादरी, समाज, धर्म के लोगों का तो विकास और कल्याण कर ही सकते हैं, करते हैं और करना चाहिए तभी वह उद्देश्य सिद्ध होगा. इसी मापदंड के आधार पर आपको यहाँ हम जो सुझाव जानकारी और दिशा बता रहे हैं उसे आप अपने समाज में लागू कर सकते हैं.
जाति के आधार पर बने उन संगठनों, समाजों, समुदायों के बारे में उनकी जाति और बिरादरी तक ही सिमटे जाने तक उनको परिभाषित करने वाली सोच के अपने अलग अलग मायने हैं और जो जिन सन्दर्भों में जो जैसा सोचते हैं उनके वह उनके अनुसार हैं. लेकिन अगर इसे व्यापक दृष्टि में सकारात्मक दृष्टिकोण से सोचा जाए तो इसे इस प्रकार देखा जाए कि विकास और उत्थान के बारे में शुरुआत अपने परिवार, समूह, जाति, बिरादरी, राज्य, धर्म, देश से की जा रही हैं, की जाति हैं और यह आगे जाकर दूसरों के परिवार, दूसरे समूह, दूसरी जाति, दूसरी बिरादरी, दूसरे धर्म, दूसरे प्रदेश, दूसरे देश के व्यक्तियों, सदस्यों, नागरिकों तक और उनके लिए की जाती हैं, की जा सकती हैं. अपने परिवार, समाज, जाति धर्म, प्रदेश के लिए जन कल्याण की भावना रखने वाले और उसे अपनों तक अपनों केउत्थान को मूर्त रूप देने वाले और देने वालों में से और उनमें से ही आगे चलकर दूसरे परिवारों, समुदायों, बिरादरियों, धर्मों, प्रदेशों, देशों के व्यक्तियों, सदस्यों और नागरिकों के कुछ या कई लोग बारे में सोचते हैं, वे व्यक्ति सामाजिक और समाज सुधारक, जन कल्याणकारी बनते हैं, बनते देखे गए हैं, बन सकते हैं और बने हैं. समाज के व्यापक विकास की दृष्टि और दिशा इसी मापदंड के अनुसार चले और निर्धारित हो तो समरसता और सामंजस्य बने रहते हुए सर्वजन कल्याण, सर्वजन हित और सर्वजन सुख की निर्धारित व्यापक सामाजिक अवधारणा, सामाजिक सोच की तरफ यह आगे चलती रहेगी और बनी रहेगी. व्यवस्था में परिवर्तन स्वतः नहीं होते हैं, कुछ व्यक्ति पहले अपने सिमित दायरे और बाद में जैसा उनको जैसी परिस्थिति मिलती हैं उस प्रकार व्यापक रूप से आगे बढ़कर उसे और व्यापक रूप देते हैं और समाज सेवा और समाज कल्याण का व्यापक रूप निर्धारित होकर सामने आकर मूर्त रूप लेता हैं.
इस दृष्टि से ही समाज, जाति, बिरादरी और धर्मों के जो संगठन बने हुए हैं वे अपने समाज के सदस्यों के हित, उत्थान और कल्याण के लिए कार्य कर सकते हैं इसे परिभाषित करने के दायरे काफी ज्यादा हैं लेकिन उपलब्ध संसाधनों या संसाधन उपलब्ध करवाकर और विकास की दिशा में वैचारिक स्तर पर समाज और समाज के लोग कैसे सोचें, कैसे करें, क्या सोचें, क्या करें, कैसे करें, कैसे मूर्त रूप देवें और कैसे समाज के सदस्यों को वांछित लाभ देवें, यहाँ इसके बारे में कुछ सुझाव दिए जा रहे हैं. अगर संगठन चाहे तो उनको अमल करने के विषय में अपने सदस्यों के साथ विचार विमर्श कर इसे लागू कर सकते हैं और अपना सकते हैं. जो सुझाव दिए गए हैं वे कार्य, उस प्रकार के कार्य और कार्यक्रम कुछ जाति, बिरादरी के संगठन और समूह अपने समाज, धर्म के संगठनों में कर रहे हैं और उनके परिणाम भी वांछित स्तर पर अपेक्षित रहे हैं. सूचना सामग्री, ज्ञान और अनुभव को बाँटने से और दूसरों को देने से ही यह आगे बढ़ता हैं. हम यह करते हैं और आपके साथ बाँट रहे हैं. अगर आपको, आपके संगठनों को या आपके संपर्क के संगठनों को आप इसके बारे में बता सकें तो मानवीय दृष्टि से बेहतर होगा, उत्तम रहेगा.

1. अपने समाजिक संगठन के सदस्यों के बच्चों को पढने के लिए प्रेरित करें, इसके लिए सामाजिक बैठकों में तय करें, विश्लेषण और सर्वे करें कि किसी परिवार के बच्चे अगर पढने नहीं जाते हैं तो उनको पढने के लिए भेजें.
2. अगर किसी परिवार के पास बच्चों को पढ़ाने के लिए सिमित संसाधन हैं और आर्थिक कमी हैं तो समाज के संसाधनों और फंड से उनको आर्थिक और अन्य आवश्यक सहायता की जाए.
3.विभिन्न समाजों द्वारा समाजिक स्तर पर प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित करवाए जाते हैं. यह समाज के स्तर पर काफी अच्छा कार्य हैं. समाज की प्रतिभाओं को और आगे लाने के लिए भी समाज अपने स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम कर सकते हैं.
जो कार्य समाज अपने स्तर पर कर सकते हैं उनमें से स्कूल-कोलेजों में पढने वाले विद्यार्थियों के लिए अलग से शिक्षण- प्रशिक्षण और ट्रेनिंग के कार्यक्रम कर सकते हैं.
इससे उनके विद्यार्थी जीवन में परीक्षा में बेहतर परिणाम के लिए लाभ मिल सकेगा और सरकारी निजी शिक्षण संस्थानों के सिमित दायरों के अध्ययन से आगे भी उनको ज्यादा सीखने को मिलेगा.
प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को रोजगार के क्षेत्र में भी दिया जा सकता हैं. कई युवा बाहर हजारों, लाखों रूपए देकर नौकरी के लिए प्रशिक्षण लेते हैं. कई जाति समाज अपने स्तर पर इस प्रकार के आयोजन और ट्रेनिंग करवा भी रहे हैं. यह अनुभव दूसरे समाज भी अपने संसाधनों के आधार पर अपने सदस्यों के युवाओं के लिए लागू कर सकते हैं.
4. समाज के स्तर पर जो समाज जो ऐसी प्रशिक्षण विंग बनाते हैं वे युवाओं को सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की जानकारी हेतु सूचना और डेटा रखें और उनको नियमित जानकारी देवें जिन्हें ऐसी जानकारी चाहिए.
5. समाज की ओर से ऐसे प्रकोष्ठ भी बनाए जाने चाहिए जो अपने समाज के युवाओं को लधु उद्यम, अपने स्वयं के द्वारा शुरू किए जा सकने वाले कारोबार और सेवा कार्यों के बारे में जानकारी दे सकें जिससे आजीविका के लिए उनके पास जो ज्ञान, स्किल, संसाधन और योग्यता हैं उसके अनुरूप उपलब्ध परिस्थितियों में वे कैसे रोजगार, काम शुरू कर सकें या जो उनकी योजना हैं उसे कैसे लागू कर सकें; जो कार्य उनके पास हैं, उनके परिवार के पास हैं उसे कैसे बेहतर बना सकें.
6. समाज की ओर से सदस्यों को सरकारी योजनाओं की निरंतर जानकारी देने के लिए भी सूचना संसाधन सेल बनानी चाहिए जो अपने समाज द्वारा संकलित किए डेटा व जानकारी से, दूसरे समाजों से मिली जानकारी से, अपने क्षेत्र में या दूसरे क्षेत्रों के कार्यरत स्वयं सेवी संस्थानों (एनजीओ ) के पास उपलब्ध जानकारी लेकर उनको प्रदान कर सकें.
7. समाज अपने सदस्यों के विकास कल्याण के लिए उन सरकारी योजनाओं का उनको लाभ दिलवा सकते हैं वे दिलवाएं. निजी तौर पर व्यक्तिओं को सरकारी विभागों में जाकर वांछित कार्य करवाने और लाभ लेने में सरकारी व्यवस्था में बैठे कई अराजक और भ्रष्ट कर्मचारियों के कारण व्यवधान और अवरोध आते हैं. सामाजिक स्तर पर मदद करने से सरकारी विभागों से वांछित और योग्य व्यक्तियों को उनके जायज हक के अनुसार सरकारी योजना का उचित लाभ मिल सकेगा.
8. समाज में वैवाहिक आयोजन एक सबसे ज्यादा मुश्किल और खर्चे वाला मामला होता हैं. इसके लिए समाज अपने स्तर पर सामूहिक मिलन जैसे कार्यक्रम रखें और और समाज में एक ऐसी विंग रखें जो वैवाहिक मामलों में जीवन साथी चुनने के लिए सर्वे, जानकारी, डेटा आदि रखें और सदस्यों में आदान प्रदान के लिए भी एक उचित माध्यम बनाकर रखें ताकि किसी परिवार और किसी व्यक्ति के लिए जैसा वांछित जीवन साथी उसी जाति-बिरादरी का चाहिए तो उनको चयन करने और ढूंढने में समाज की इस विंग के माध्यम से आसानी हो सके.
इसके लिए समाज अपने दूसरे जिलों और राज्यों में भी सूचना और जानकारी का आदान प्रदान कर इसे और बेहतर बना सकत हैं.
9. सामूहिक रूप से विवाह समारोहों का आयोजन काफी जाति बिरादरियों में चल रहे हैं. इसे अन्य समाज भी लागू करते हैं ताकि परिवारों पर वैवाहिक आयोजन में होने वाले अनावश्यक खर्चों और दहेज़ के मसलों पर नियंत्रण और नियोजन में काफी सहायता मिलेगी. इस मामले में एक दूसरे समाज के प्रतिनिधि आपस में अपने समाज में किए जाने वाले सामूहिक वैवाहिक आयोजनों के बारे में अपने अनुभव बाँट सकते हैं ताकि दूसरे समाजों के अनुभव के आधार पर वे अपने समाज में और किस तरह से बेहतर या नियोजित रूप से समारोह आयोजित कर सकें.
10. सामूहिक विवाह समारोह के उपरांत भी समाज के परिवारों में समरसता बनी रहे, सदस्यों का जीवन यापन बेहतर रहे, परिवारों की एक जुटता व मधुर सम्बन्ध बने रहे इसके लिए भी समाज अपने स्तर पर एक बेहतर कार्य कर सकता हैं.
समाज के परिवारों में परिवार के सदस्य सही तरह से मधुर सम्बन्ध बनाकर रखें इनके लिए समाज की ओर से पारिवारिक परामर्श सेवा केंद्र शुरू करना चाहिए. परिवार परामर्श केन्दों में परिवारों में अगर कोई विवाद या समस्या का मामला हो, परिवार के सदस्यों में विवाद हो तो परिवार के सदस्यों या उनसे परामर्श कर समाधान किया जा सके. अगर परिवार का एक सदस्य दूसरे स्थान से हैं तो समाधान के आगे की दिशा में उस जगह के समाज के लोगों से भी बात कर विवाद या समस्या का समाधान समाज के स्तर पर ही करें. इस प्रकार के मामले नैतिक, सामाजिक और कानूनी दायरों में हो यह समाज के लोग ध्यान रखें.
11. समाज अपने सदस्यों के विकास कल्याण के लिए सरकारी योजनाओं, सरकारी बैंकों से ऋण दिलवाकर जो लाभ दिलवा सकते हैं वे दिलवाएं. निजी तौर पर व्यक्तिओं को बैंकों में जाकर ऐसी कार्य करवाने में कई बार दिक्कतें आती हैं इसलिए सामाजिक स्तर पर मदद करने से बैंक से भी उनको उनके जायज हक के अनुसार लाभ मिल सकेगा.
समाज की ओर से इस प्रकार के बैंकों की जानकारी भी करवाई जाए जहाँ पारदर्शिता से उनको उनके जायज हक के अनुरूप असने से ऋण और अन्य लाभ मिल सकते हैं या उनके नियमों के तहत वांछित कार्य सहजता से हो सकते हैं.
12. समाज अपने संसाधनों से एक ऋण का कोष तैयार कर जरूरतमंदों को कानूनी और नैतिक दृष्टि से उचित आवश्यकताओं के लिए ऋण प्रदान कर सकते हैं.
13. कई समाज अपने स्तर पर स्वास्थ्य जाँच के लिए मेडिकल चेकअप कार्यक्रम करवाते रहते हैं, इस प्रकार के कार्यक्रम सामाजिक स्तर पर और व्यापक स्तर पर किए जा सकते हैं.
समाज के स्तर पर जिन लोगों के स्वास्थ्य का लाभ सरकारी अस्पतालों से मिल सके इसकी लिए सहायता विंग बने और स्वयं सेवी संस्थानों (एनजीओ) के मदद से अस्वस्थ लोग सरकारी अस्पतालों में कम खर्च में इलाज करवा सकें.
13. कई बार कुछ इलाज सरकारी अस्पतालों में नहीं होते हैं या महंगे होते हैं. कई इलाज निजी अस्पतालों में लाखों के खर्चे के होते हैं. ऐसे इलाज करने से लोगों के घर तक बिक जाते हैं.
समाज ऐसे कु्छ मामलों में जहाँ आर्थिक सहायता की जरुरत हो,अपने समाज के उन सदस्यों को आर्थिक लाभ दे सकते हैं ऋण भी दे सकते हैं ताकि वे अपना महंगा इलाज आसानी से करवा सकें.
14. कुछ निजी अस्पताल मुफ्त में और कम से कम खर्चे में भी इलाज करते हैं समाज के स्तर पर ऐसे अस्पतालों की जानकरी सदस्यों को करवाई जा सकती हैं. समाज स्वयं सेवी संस्थानों (एनजीओ) से सभी उनके क्षेत्र के ऐसे अस्पतालों की जानकरी लेकर रख सकते हैं.
15. समाज में कई वृद्ध ऐसे होते हैं जिनके परिजन नहीं होते हैं या मदद नहीं कर सकते हैं. ऐसे वृद्धजनों के लिए पूर्णकालिक या अंशकालिक वृद्धाश्रम भी समाज बनवा सकते हैं. जो वृद्धाश्रम बने हुए हैं उनके यहाँ उनको रेफर कर सकते हैं, जानकारी दे सकते हैं. कई वृद्ध संसाधन रखते हैं लेकिन उनकी सहायता के लिए कोई व्यक्ति उनके परिवार में नहीं होता हैं. ऐसे वृद्दों को मदद देने और प्रेरित करने से वे वृद्ध अपना अतिरिक्त जमा धन और संसाधन समाज को दे सकते हैं ताकि समाज उस राशी और संसाधनों से उनके लिए, उनके जैसे दूसरों के लिए और समाज अपने अन्य सदस्यों के लिए कुछ कर सके.
16. एक कोई जाति-संगठन अगर सक्षम हैं तो वह हमारे देश समाज में अन्य जातियों के जरूरतमंद मेहनती लोगों के लिए भी आर्थिक सहायता कर सकते हैं. इस प्रकार के संगठनों में संपन्न व्यक्तिओं के समूह और कुछ व्यापारिक संस्थाएं भी आ सकती है जिसमें व्यापर या कार्य से जुड़े सदस्य हों. ऐसे संगठनों में विभिन्न जाति बिरादरी और धर्म के लोग भी जुड़े रहते है इस लिहाज से भी वे जन कल्याण और सहायता की दिशा में अपने मापदंड तय कर सकते है.