बिहार

बिहार के विकास में एनजीओ की भूमिका प्रेरक व निर्णायक

बिहार के स्वयं सेवी संस्थान, सामाजिक संगठन, गैर लाभ संगठन / गैर सरकारी संगठन (एनजीओ / एनपीओ) राज्य और यहाँ की जनता के सामाजिक विकास और कल्याण का हिस्सा हैं. बिहार में एनजीओ शहरी और ग्रामीण समुदायों के सामाजिक विकास कार्यक्रमों और जनकल्याण कार्यक्रमों और गतिविधियों के जरिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं. बिहार में एनजीओ की सरकार और जन कल्याण समूहों द्वारा संचालित और आयोजित सामाजिक विकास और जन कल्याण के कार्यक्रमों और मुद्दों में निरंतर भागीदारी रही है. बिहार के एनजीओ हमेशा बल कल्याण, जन विकास, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और अन्य उद्देश्यों पर आधारित जनउत्थान और बेहतरी की योजनाओं में भाग लेने के लिए और काम करने के लिए आगे रहे है तथा समाज सेवा कार्यों के लिए तत्पर रहते हैं.
बिहार में गैर सरकारी संगठन बाल शिक्षा, बाल कल्याण, बाल अधिकार, महिला विकास, महिला सशक्तीकरण, वृद्ध जनों के कल्याण के लिए, वृद्धाश्रमों के सञ्चालन, शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों, पिछड़ी बस्तियों और बच्चों के उत्थान के लिए काम कर रहे हैं. एनजीओ अच्छी तरह से शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि विकास, सामाजिक जागरूकता, पिछड़ा और वंचित समुदायों के उत्थान, गरीबी और संकट में राहत के कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं.
बिहार में गैर सरकारी संगठनों द्वारा रोजगार, कन्या भ्रूण हत्या रोकने, प्राकृतिक जल संचयन, पशु कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, खेल, कला का विकास, शिल्प और संस्कृति, विरासत संरक्षण, ऐतिहासिक स्थानों के संरक्षण से संबंधित कार्यक्रमों और अन्य विविध जन कल्याण और विकास से सम्बंधित कार्यक्रमों को लागू किया जा रहा है. बिहार में पर्यावरण सुरक्षा और संरक्षण, मानव अधिकार, सामाजिक समानता, पेयजल मुद्दों, कानूनी जागरूकता और सहायता, पोषण, सूचना का अधिकार, ग्रामीण और शहरी विकास, स्वयं सहायता समूहों के गठन और समर्थन, अनुसंधान और विकास जैसे मुद्दों पर गैर-सरकारी संगठन मुख्य रूप से निरंतर सक्रिय है और इनको लागू करने का मुख्य हिस्सा हैं.


 

बिहार के एनजीओ